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संपादकीय |
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सनातन भारतीय संस्कृति की मान्यताओं, आदर्शों व परम्पराओं का निर्वहन कर समाज के रचानात्मक विकास में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध; सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण जैसे उदात्त मानव मूल्यों के धरातल पर खड़ी भारत विकास परिषद् उद्भव से लेकर आज तक विकास एवं संवर्धन में कटिबद्ध है। |
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देश के सर्वांगीण विकास की स्वप्निल मंजिल की ओर अग्रसर इसकी भावयात्रा में शामिल राष्ट्र सपूतों ने निष्काम सेवा-भाव, राष्ट्र-आराधना, त्याग और समर्पण के बल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वैदिक संस्कृति से जुड़ी हुई परिषद की अवधारणा राष्ट्रीय समस्याओं के लिए गहन चिन्तन कर समाधान ढूंढने का सार्थक प्रयास है। |
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परिषद् के राष्ट्र-जीवन को समुन्नत करने के उद्देश्यों से प्रभावित होकर 6 मई 1999 में राजस्थान पश्चिम प्रान्त के सांचोर उपखण्ड मुख्यालय पर शाखा का गठन किया गया। पिछले आठ वर्षों से विविध सेवा कार्यों में संलग्न स्थानीय शाखा ने अपनी जनोपयोगी प्रवृतियों को निरन्तर बढ़ावा दिया है। परिषद् ने विविध प्रकल्पों के अलावा अगस्त 2005 से विकलांग सहायता एवं पुनर्वास केन्द्र तथा चल चिकित्सा इकाई के स्थाई सेवा कार्य प्रारम्भ किये हैं। इन प्रकल्पों के सफलतापूर्वक संचालन हेतु अनेक दानवीर भामाशाह का योगदान स्तुत्य है। स्थायी प्रकल्पों द्वारा पिछले दो वर्ष में पीडित मानवता की सेवा के लिए जो-जो कोशिशें की गई, उसको क्रमबद्धरूप से जन-जन तक पहुंचाना हमारा परम कत्तव्य है। इसी उद्देश्य को लेकर www.bvpsanchore.com नामक वेब साइट बनाई गई है। इसमें न केवल स्थायी प्रकल्पों के वार्षिक सेवा कार्यों का ब्यौरा वरन् स्थानीय शाखा का परिचय, कार्यकारिणी एवं चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्यों की सूची, परिषद् की सम्पूर्ण गतिविधियों एवं भावी योजनाओं को भी निरूपित किया गया है और समय-समय पर नवीन जानकारी अप-लोड की जाती रहेगी |
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परिषद् की विविध गतिविधियों एवं स्थायी सेवा प्रकल्पों के संचालन में सहयोग प्रदान करने वाले भामाशाहों के हम आभारी है, जिनके सहयोग से परिषद् निरन्तर से कार्यों में जुड़ी रही।
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