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समाज के विभिन्न व्यवसायों व कार्यों में श्रेष्ठतम् लोगों का एक राष्ट्रीय, अराजनैतिक, नि:स्वार्थ समाजसेवी एवं सांस्कृतिक संगठन है, भारत विकास परिषद्। भारतीय समाज के सर्वागीण विकास करने के उद्देश्य से ही इस संस्था की स्थापना की गई। डॉ. सूरज प्रकाश के नेतृत्व में 10 जुलाई 1963 में दिल्ली में इस अद्वितीय संगठन का श्री गणेश हुआ। निरन्तर प्रगति करते हुए वर्तमान में देश विदेश में इसकी 1100 शाखाएं तथा 75000 से अधिक सदस्य परिषद् के साथ जुड़े है। परिषद् की स्वर्ण जयन्ती विजय 2013 में इसकी 5000 शाखाएं तथा 2 लाख से अधिक पारिवारिक सदस्य बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। |
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भारत विकास परिषद् क्लब नहीं है। यह है सम्पन्न व प्रबुद्ध वर्ग का एक ऐसा संगठन, जिसके माध्यम से यह अपने सिद्धान्तों उद्देश्यों के अनुरूप समाज व राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित है। इसका संगठन केन्द्र, प्रान्व व शाखा स्तर पर किया गया है। पूरे भारत में 58 प्रान्तों व 15 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। केन्द्र में राष्ट्रीय कार्यकारी मण्डल अपने पदाधिकारियों का चुनाव स्वयं करता है। प्रान्तीय स्तर पर प्रान्तीय मण्डल होता है जिसके सदस्य उसके अधीन शाखाओं के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्क्ष होते है। प्रान्तीय मण्डल द्वारा प्रान्तीय अध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष का चुनाव होता है जो अन्य पदाधिकारी मनोनित करते है। शाखा परिषद् की प्राथमिक इकाई है जिसमें कम से कम 25 व्यक्तियों को लेकर गठन किया जा सकता है। परिषद् की सम्पूर्ण गतिविधियां सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण-पंच सूत्रों के आधार पर संचालित की जाती है। |